वैदिक सभ्यता की समृद्ध ज्ञान संपदा
सरस्वती घाटी की सभ्यता मानव इतिहास की पहली आर्य सभ्यता थी। इस क्षेत्र को ब्रह्मावर्त कहा जाता था। यहां ही वैदिक ग्रथों की रचना हुई।
वैदिक ज्ञान संपदा -
★ज्ञान का स्त्रोत -
वेद - वेद विश्व का प्रथम ज्ञान ग्रंथ है। यह सभी ज्ञान का स्त्रोत है। वेदों को चार भागों में बाटा गया है। वेदों को मानने वालों को वैदिक कहा जाता है।
वेद और उनके विषय
१) ऋग्वेद - ज्ञान
२) यजुर्वेद - कर्म
३) सामवेद - उपासना
४) अथर्ववेद - विज्ञान
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उपवेद - वेदों से निकली हुई ज्ञान की शाखा उपवेद है। प्रत्येक वेद का अपना उपवेद होता है।
१) आयुर्वेद -
वेद - ऋग्वेद
विषय - वैद्यकिय विज्ञान
लेखक - धन्वंतरि
२) धनुर्वेद -
वेद - यजुर्वेद
विषय - सैन्य विज्ञान
लेखक - विश्वामित्र
३) गंधर्ववेद -
वेद - सामवेद
विषय - शास्त्रीय संगीत
लेखक - ऋषि भरत
४) शिल्पवेद -
वेद - अथर्ववेद
विषय - अभियांत्रिकी
लेखक - विश्वकर्मा
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★षड्दर्शन (Six School of Vedic Philosophy)
दर्शन और संस्थापक
१) सांख्य - कपिल
२) योग - पतंजलि
३) न्याय - गौतम
४) वैशेषिक - कणाद
५) मीमांसा - जैमिनी
६) वेदांत - व्यास
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★आध्यात्मिक ज्ञान ग्रंथ -
उपनिषद - गुरु के पास बैठ कर प्राप्त किया गया ज्ञान उपनिषद है। उपनिषद वैदिक दर्शन का शिखर माना जाता है।
इसे वेदांत दर्शन भी कहा जाता है। वैदिक धर्म मे इसे अत्यंत महत्व प्राप्त है।
मुख्य उपनिषदो की संख्या 11 है।
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★ अध्यात्म का सार
गीता - गीता को वेद और उपनिषदों का दर्शन का सार माना जाता है।
१) अष्टवक्र महागीता
२) भगवत गीता
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★इतिहास ग्रंथ -
१) रामायण
२) महाभारत
रामायण और महाभारत को इतिहास ग्रंथ माना जाता है। इसमे प्राचीन वैदिक सभ्यता, शासक, वंशावली, साम्राज्य, युद्ध और समाज का इतिहास है।
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★नीति ग्रंथ -
स्मृति ग्रंथ - स्मृति ग्रंथो में धार्मिक, राजकीय, सामाजिक, आर्थिक और नैतिक नीति पर चर्चा की गई है।
समयानुसार नीति ग्रंथो में परिवर्तन की अनुमति है।
स्मृति ग्रंथ - मनुस्मृति,अत्रि स्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति, बृहस्पति स्मृति, पराशर स्मृति, व्यास स्मृति, दक्ष स्मृति, गौतम स्मृति, वशिष्ठ स्मृति और अन्य।
मनुस्मृति सबसे प्राचीन स्मृति ग्रंथ है। सभी स्मृतियों में मनुस्मृति को सबसे अधिक महत्व प्राप्त है।
पर वैदिक काल मे स्मृति ग्रंथो को ज्यादा गंभीरता से नही लिया जाता था।
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★कथा ग्रंथ -
पुराण - पुराण यह प्राचीन कथाओ का संग्रह है। जो नैतिक शिक्षा देने के लिए रचे गए है। मुख्य पुराणों की संख्या 18 है। इसमें भागवत पुराण को महापुराण कहा जाता है।
पुराणों से ही अलग अलग संप्रदायो का जन्म हुआ, जिसमे से वैष्णव, शैव, शाक्त प्रमुख है।
१) वैष्णव - वैष्णव संप्रदाय के लोग विष्णु की उपासना करते है । वैष्णव विष्णु के 24 अवतरो को मानते है। इस संप्रदाय में भागवत पुराण और विष्णु पुराण को अत्यंत पूजनीय माना जाता है।
२) शैव - शैव संप्रदाय के लोग शिव की उपासना करते है। इस संप्रदाय में शिव पुराण को अत्यंत पूजनीय मानते है।
३) शाक्त संप्रदाय - यह शक्ति के उपासक है । और देवी भागवत पुराण शाक्तों का पूजनीय ग्रंथ है।