ओशीनम - 108 महासाधना

OSHINAM

108 Gates of Consciousness
01अंतराल

दो श्वासों के बीच के विराम में ठहरें।

02संधि-स्थल

श्वास मुड़ने के केंद्र को महसूस करें।

03बाह्य कुंभक

श्वास बाहर छोड़कर शून्य में रुकें।

04आंतरिक पूर्णता

श्वास भरकर भीतर के शून्य को देखें।

05ऊर्जा धारा

रीढ़ में बिजली जैसा प्रवाह महसूस करें।

06तीसरा नेत्र

भौहों के मध्य प्रकाश पर एकाग्र हों।

07नाद अंत

ध्वनि के विलीन होने पर मौन सुनें।

08रिक्त मस्तक

कल्पना करें सिर नीला आकाश है।

09हृदय प्रेम

हृदय केंद्र से अस्तित्व को गले लगाएं।

10साक्षी भाव

विचारों को पर्दे की फिल्म जैसा देखें।

11प्राग-शब्द

शब्द उठने से पहले के मौन को पकड़ें।

12विसर्जन

महसूस करें शरीर धीरे-धीरे गल रहा है।

13प्रकाश कण

आँखों के सामने के सूक्ष्म प्रकाश को देखें।

14लयबद्ध हृदय

अपनी धड़कन को पूरे ब्रह्मांड की लय मानें।

15शुद्ध स्पर्श

छूने की संवेदना में पूरी तरह डूब जाएं।

16खोखली बांसुरी

स्वयं को शून्य और हवा का मार्ग मानें।

17अंधकार दर्शन

अंधेरे में देखते हुए उसके साथ एक हो जाएं।

18रस चेतना

खाते समय केवल 'स्वाद' बनकर रह जाएं।

19निद्रा संधि

नींद आने के ठीक पहले के होश को पकड़ें।

20अचानक ठहराव

चलते हुए अचानक पत्थर की तरह रुक जाएं।

21ऊर्ध्वगमन

ऊर्जा को रीढ़ से सिर तक उठता देखें।

22भाव साक्षी

क्रोध/भय को आता-जाता तूफान मानें।

23हस्त ऊष्मा

हाथों के बीच की ऊर्जा को महसूस करें।

24अविराम दृष्टि

वस्तु ओझल होने तक एकटक देखते रहें।

25गहरा हृदय

हृदय को विचारों का कब्रिस्तान मानें।

26मौन रस

बिना कारण चुप रहकर सन्नाटा चखें।

27विराट विस्तार

आकाश में शरीर को फैला हुआ मानें।

28विचार नदी

विचारों को बहने दें, किनारे पर बैठें।

29नाभि केंद्र

ऊर्जा के मूल स्रोत नाभि पर टिकें।

30वाणी स्रोत

शब्द जहाँ से पैदा होते हैं, वहाँ देखें।

31अकारण मुस्कान

भीतर एक दिव्य प्रसन्नता बनाए रखें।

32अधि-गंध

गंध के साथ स्वयं गंध बन जाएं।

33मौन अंतराल

दो वाक्यों के बीच के खालीपन को सुनें।

34प्रकाश देह

शरीर के भीतर चमकदार देह का अनुभव करें।

35अर्ध-दृष्टि

आँखें आधी खुली रखकर मध्य में ठहरें।

36अनहद नाद

भीतर गूँज रहे सनातन संगीत को पकड़ें।

37स्वप्न होश

सपने में याद करें कि यह एक सपना है।

38शून्य विश्राम

2 मिनट के लिए सब कुछ छोड़कर मर जाएं।

39धरा स्पर्श

नंगे पैर जमीन की ऊर्जा को हृदय में लें।

40बिंदु मात्र

स्वयं को एक अत्यंत सूक्ष्म बिंदु मानें।

41-60तत्व दर्शन

अग्नि, जल और वायु तत्वों के साथ तादात्म्य बैठाएं। मृत्यु प्रयोग करें।

61-80महाशून्य

नीले आकाश, नामहीन अस्तित्व और ध्वनि के मध्य के अंतराल में खो जाएं।

81-100परम निर्वाण

बिना आधार के बैठें। दृष्टा को भी मिटा दें। केवल 'होना' शेष रहे।

101-108ओशीनम

समय से पार। तरल प्रकाश। अंतिम विसर्जन और शाश्वत आनंद।

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