OSHINAM
दो श्वासों के बीच के विराम में ठहरें।
श्वास मुड़ने के केंद्र को महसूस करें।
श्वास बाहर छोड़कर शून्य में रुकें।
श्वास भरकर भीतर के शून्य को देखें।
रीढ़ में बिजली जैसा प्रवाह महसूस करें।
भौहों के मध्य प्रकाश पर एकाग्र हों।
ध्वनि के विलीन होने पर मौन सुनें।
कल्पना करें सिर नीला आकाश है।
हृदय केंद्र से अस्तित्व को गले लगाएं।
विचारों को पर्दे की फिल्म जैसा देखें।
शब्द उठने से पहले के मौन को पकड़ें।
महसूस करें शरीर धीरे-धीरे गल रहा है।
आँखों के सामने के सूक्ष्म प्रकाश को देखें।
अपनी धड़कन को पूरे ब्रह्मांड की लय मानें।
छूने की संवेदना में पूरी तरह डूब जाएं।
स्वयं को शून्य और हवा का मार्ग मानें।
अंधेरे में देखते हुए उसके साथ एक हो जाएं।
खाते समय केवल 'स्वाद' बनकर रह जाएं।
नींद आने के ठीक पहले के होश को पकड़ें।
चलते हुए अचानक पत्थर की तरह रुक जाएं।
ऊर्जा को रीढ़ से सिर तक उठता देखें।
क्रोध/भय को आता-जाता तूफान मानें।
हाथों के बीच की ऊर्जा को महसूस करें।
वस्तु ओझल होने तक एकटक देखते रहें।
हृदय को विचारों का कब्रिस्तान मानें।
बिना कारण चुप रहकर सन्नाटा चखें।
आकाश में शरीर को फैला हुआ मानें।
विचारों को बहने दें, किनारे पर बैठें।
ऊर्जा के मूल स्रोत नाभि पर टिकें।
शब्द जहाँ से पैदा होते हैं, वहाँ देखें।
भीतर एक दिव्य प्रसन्नता बनाए रखें।
गंध के साथ स्वयं गंध बन जाएं।
दो वाक्यों के बीच के खालीपन को सुनें।
शरीर के भीतर चमकदार देह का अनुभव करें।
आँखें आधी खुली रखकर मध्य में ठहरें।
भीतर गूँज रहे सनातन संगीत को पकड़ें।
सपने में याद करें कि यह एक सपना है।
2 मिनट के लिए सब कुछ छोड़कर मर जाएं।
नंगे पैर जमीन की ऊर्जा को हृदय में लें।
स्वयं को एक अत्यंत सूक्ष्म बिंदु मानें।
अग्नि, जल और वायु तत्वों के साथ तादात्म्य बैठाएं। मृत्यु प्रयोग करें।
नीले आकाश, नामहीन अस्तित्व और ध्वनि के मध्य के अंतराल में खो जाएं।
बिना आधार के बैठें। दृष्टा को भी मिटा दें। केवल 'होना' शेष रहे।
समय से पार। तरल प्रकाश। अंतिम विसर्जन और शाश्वत आनंद।
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